पेट में बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Fri 3rd Feb 2023 : 09:46

भ्रूण के वजन को बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थ :-

हरी सब्जियां

हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, ब्रोक्ली में फोलेट और फोलिक एसिड होते हैं, जो शिशु को जन्म संबंधी कई विकारों से बचाते हैं। इसके साथ ही यह आयरन का भी अच्छा स्रोत हैं, जिससे शरीर में खून की कमी नहीं होती। भ्रूण के वजन को बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थ में हरी पत्तेदार सब्जियों को अवश्य शामिल करें।

अंडे का करें सेवन

अंडे में प्रोटीन होती है, जिससे एमिनो एसिड मिलता है और यह शिशु के लिए जरूरी है। अंडों के कई विटामिन और मिनरल भी मौजूद होते हैं जैसे कोलिन जो शिशु के दिमागी विकास में मदद करते हैं। ऐसे में अंडों का सेवन करना न भूलें। लेकिन, गर्भावस्था में कच्चे या अधपके अंडों का सेवन करने से बचे।

नॉनवेजिटेरियन तो मछली खाते समय रखें सावधानी

मछली में भी प्रोटीन और हेल्दी ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए जरूरी है। मछली हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए आवश्यक है। लेकिन कच्ची या अधपकी मछली न खाएं। इसके साथ ही ऐसी मछली का सेवन भी न करें जिसमें पारा(Mercury) होता है। आप चाहे तो इस बारे में डॉक्टर से भी जानकारी ले सकते हैं कि मछली खाते समय किन बातों का विशेष तौर पर ख्याल रखना चाहिए। डॉक्टर आपको कुछ मछलियों के नाम भी बताएंगे तो गर्भावस्था में खाना सुरक्षित होता है।

फल

अपने आहार में फलों को भी शामिल करें। जैसे सेब , इसमें फाइबर की उच्च मात्रा होती है जिससे गर्भवती महिला की पाचन क्रिया सही रहती है। इसके साथ ही कब्ज से भी राहत मिलती है। केले, तरबूज और तरह-तरह की बेरीज जैसे ब्लूबेरी,स्ट्रॉबेरी आदि भी गर्भवस्था में शिशु के विकास में मददगार हैं।

खट्टे फल

भ्रूण के वजन को बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थ में अगले हैं खट्टे फल। खट्टे फलों में विटामिन सी पाया जाता है जैसे संतरा,मौसमी, आंवला, नींबू आदि। इसके साथ ही इसमें फाइबर और फोलिक एसिड की भी अच्छी मात्रा होती है। इससे भ्रूण के विकास में मदद मिलती है।

साबुत अनाज

साबुत अनाज में भी फोलिक एसिड, फाइबर और आयरन की अच्छी मात्रा होती है। इन्हें लेने से भी गर्भवती महिला के शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है, जिससे भ्रूण अच्छे से बढ़ता है। गर्भावस्था में साबुत अनाज जैसे ब्राउन राइस, दलिया आदि का सेवन भी करना आवश्यक है।

दालें

दालों (जैसे चना दाल, मूंग दाल, कला चना, मसूर दाल आदि) में फोलेट और विटामिन B भरपूर मात्रा में होते हैं। फोलेट सेहतमंद गर्भावस्था के लिए बेहद आवश्यक है और इससे जन्म संबंधी विकारों से भी छुटकारा मिलता है। भ्रूण के वजन को बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थ में दालों का होना भी आवश्यक है।

पनीर

पनीर कैल्शियम, प्रोटीन और ओमेगा 3 का अच्छा स्रोत है। इसके कारण आप गर्भावस्था में इसे खा सकती हैं। इससे गर्भ में पल रहे शिशु की जरूरतें पूरी होती है। हालांकि इस दौरान सीमित मात्रा में ही इसे खाने की सलाह दी जाती है।

एवोकाडो

एवोकाडो में भी पोटेशियम और फोलिक एसिड अधिक मात्रा में होता है। जिससे भ्रूण का विकास अच्छे से होता है। इसके साथ ही इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम और फाइबर भी होता है, जिससे बच्चे की हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं। भ्रूण के वजन को बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थ में एवोकाडो लेने से आपको और आपके बच्चे दोनों को फायदा होगा।

बीज

सीडस यानी बीज में स्वस्थ वसा, प्रोटीन, फोलेट, विटामिन E , मैग्नीशियम और ओमेगा 3 आदि भरपूर होते हैं इसलिए इन्हें पावर फूड भी कहा जाता है। इसके अलावा इनमें फाइबर भी होता है। बीज में मौजूद ओमेगा 3 शिशु के दिमागी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इसलिए चिया बीज, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज, तरबूज के बीज आदि का सेवन इस दौरान करना चाहिए।

भ्रूण के वजन को बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थ : मेवे का सेवन

शोध के अनुसार गर्भावस्था के दौरान मेवे खाने से गर्भ में पल रहे शिशु को एलर्जी से बचाने में मदद मिल सकती है। अखरोट, बादाम, मूंगफली आदि फोलिक एसिड, कॉपर, आयरन आदि का अच्छा स्रोत है। इसके साथ ही इनमें प्रोटीन और स्वस्थ फैट भी होता है जिससे भ्रूण का वजन बढ़ता है। आप रोजाना अलग-अलग मेवे का सेवन कर सकती हैं ताकि आपको सभी मेवे से पोषण प्राप्त हो सके। एक बार में अधिक मेवे का सेवन करने से बचें।

फलियां (legumes)

फलियां (legumes) को आप साबुत दालें भी कह सकते हैं जैसे राजमा, सोयाबीन, साबुत माह, साबुत मुंग, लोबिआ आदि। इनमें फाइबर, प्रोटीन, आयरन, फोलेट और कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है। जिनकी गर्भावस्था के दौरान शरीर की जरूरत होती है। यह मां और भ्रूण दोनों के स्वास्थ्य के लिए यह जरूरी हैं।

शकरकंदी

शकरकंदी में बीटा कैरोटीन भरपूर होती है, जो एक ऐसा तत्व है जो विटामिन A में परिवर्तित हो जाता है। विटामिन A कोशिकाओं और टिश्यूस के विकास के लिए बहुत आवश्यक होता है। यानी गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए शकरकंदी खाना न भूले। इससे स्टार्च के रूप में ऊर्जा भी मिलती है। अगर आपको डायबिटीज की समस्या है तो बेहतर होगा कि किसी भी फूड को खाने से पहले डॉक्टर की राय जरूर लें।

भ्रूण का वजन बढ़ाने के टिप्स : दूध है जरूरी

दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ गर्भावस्था के लिए जरूरी हैं। यह न केवल मां बल्कि शिशु के लिए भी लाभदायक है। दूध प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है। अगर शरीर में प्रोटीन की कमी होगी, तो जन्म के समय शिशु का वजन कम हो सकता है। यही नहीं, प्रोटीन से शिशु को पूरा पोषण मिलता है। इसके साथ ही कैल्शियम शिशु की हड्डियों और दांतों के लिए फायदेमंद हैं। आप दूध का सेवन रात के समय या फिर दुध से बने फूड का सेवन भी कर सकते हैं। अगर आपको दूध से एलर्जी है तो बेहतर होगा कि आप दूध के विकल्पों का चयन करें ताकी आपके शरीर में प्रोटीन और कैल्शियम की कमी न हो सके।

मीट

मीट भी प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। इसके साथ ही इसमें आयरन, कोलिन और विटामिन B की अच्छी मात्रा होती है। जो शिशु और मां दोनों के लिए लाभदायक है। मीट का सेवन करने से पहले उसे अच्छे से साफ करें और उचित ताप में पकाने से बाद ही खाएं। अगर मीट को अच्छी तरह से पका कर नहीं खाया गया तो मां और होने वाले शिशु को नुकसान भी पहुंच सकता है। आप इस बारे में डॉक्टर से भी जानकारी ले सकते हैं।

गर्भावस्था में पानी की न होने दें कमी


प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे का वजन कैसे बढ़ा सकते हैं, इस बारे में आपको जानकारी तो प्राप्त हो गई है। अब आपको इस बारे में भी जान लेना चाहिए कि शरीर के लिए जितना अहम ठोस आहार है, उतना ही अहम तरल पदार्थ भी है। शरीर में पानी की कमी के कारण गर्भवती महिला को डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है जो होने वाले बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आपको दिन में सात से आठ ग्लास पानी के साथ ही लिक्विड फूड भी लेना चाहिए। ऐसा करने से पानी की कमी से बचा जा सकता है। आप इस विषय में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से भी परामर्श कर सकते हैं।


भ्रूण का वजन बढ़ाने के टिप्स : इन सप्लीमेंट्स का करें सेवन


इन खाद्य पदार्थों के साथ ही गर्भावस्था में सप्लीमेंट लेना न भूले। क्योंकि, कई बार खाद्य पदार्थों से आपको पूरे पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इसलिए, डॉक्टर आयरन, फोलिक एसिड आदि के सप्लीमेंट देते हैं। ताकि, गर्भ में शिशु का वजन बढे और उसका विकास सही से हो सके।

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